Thursday, December 27, 2012

अभिव्यक्ति के सारे ख़तरे


सर्दियाँ आती हैं और हम कम्बल बाँटते हैं। लेकिन उससे   संतोष कम, दुःख और असंतोष  की भावना ही ज्यादा  प्रबल होती है। ग़रीबी का ये आलम, देख कर ही यकीन में बदल सकता है। वो मिटटी मैं काम करते करते काले पड़े  हाथ और नंगे  चलने से   फटे हुए पैर . आजादी को 66 साल हो गए लेकिन   आर्थिक विषमता का ये वीभत्स चेहरा . कहाँ सोयी है सरकार ? कहाँ हैं वे जन प्रतिनिधि  जो हजारों वोटों से यहाँ से जीत  कर जाते हैं? क्यों नहीं वे यहाँ कभी लौट कर आते ? 

ऐसे कुछ सवाल इस बार इन लोगों के बीच हमने छोड़े हैं? मुक्तिबोध के शब्दों में -
अब अभिव्यक्ति के सारे ख़तरे 
उठाने ही होंगे। 
तोड़ने होंगे ही मठ और गढ़ सब। 
नगला खना से शुरू कर  राजेपुर  कुर्रा, मूंज खेड़ा होते हुए हम नगला नकारा पहुंचे। इस दौरान नगला चतुरी और नगला पद्म के साथी भी शामिल हुए जिनमें से कुछ को हम लोग मदद कर पाए। ये मदद भी कोई मदद है ! लेकिन जैसा कि  किसी ने कहा है, 'A journey of thousand miles begins with one small step' We surely have taken that small step.

कडाके की इस सर्दी में जो साथी साथ रहे उनका शुक्रिया। ख़ास तौर से प्रभात भाई आपका। अब तो शाहिद को भी शुक्रिया कहना होगा आखिर वो हैदराबाद से चलकर जो आये हैं। धर्मेन्द्र, सुधीर जो लखनऊ से आये और साजिद, मनीष भाई , संजय भाई जिनके कारण ये सब intervention संभव हो पा रहे हैं। आरिफ़ और  करुणेन्द्र के कारण कम्बल जुट सके उनको साधुवाद। जिन्होंने इस यात्रा को संभव बनाया कुलदीप भाई , आशीष, वीरभान का धन्यवाद और आभार .

Friday, November 23, 2012

Quiz, Debate and the Camp

पिछले साल दो अक्टूबर को हम ने  एक सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता  का आयोजन किया था। इस बार मित्रों ने कहा कि  इसे बाल  दिवस 14 नवम्बर को रखा जाय। नेहरु जी से हमें कोई आपत्ति नहीं लेकिन उन्हें याद करने वालों की इस देश में  कोई कमी नहीं है . लेकिन ऐसे स्वतन्त्रता सेनानी जिन्होंने देश के लिए  अपने  प्राणों का उत्सर्ग तक कर दिया उन्हें याद करने वाले लगातार कम होते जा रहे हैं।  अतः निर्णय हुआ कि  हम लाला लाजपत राय की पुन्य तिथि के अवसर पर इस आयोजन को करेंगे .

The preparations started quite in advance yet we had many things to fix even till the last day. Considering the huge issues we had on evaluation last year, we reduced the number of questions to 50. the preparation of paper was the responsibility of Shahid but he has now got busy with his work at Maulana Azad National Urdu University and therefore we had to do our bit. Thanx are due to Daya, Rajeev and Saurabh who made it possible in the given time frame. Raju and Rajesh also chipped in with their support.The estimated number of participants turned out to be way off the mark. We had taken a 1000 copies of the paper but the actual number was only 300.

This time we had  prizes in both the boys and girls category since last time boys had cornered most of the prizes. The Certificates and trophies were good and could all be collected in time, thanks to the efforts of Himanshu and Daya.

It was also decided to conduct a debate on the issue of development vs environment. इधर debate चल रही थी उधर कॉपियां जाँच रहीं थी। बच्चे खूब बोले और अच्छा बोले। मोहित, योगेन्द्र और भास्कर ने जज की भूमिका बखूबी निभायी।

कॉपियां जाँचने में इस बार भी अच्छा खासा वक़्त लगा। काश हमारे पास OMR sheets होतीं और हम खट  से evaluation कर पाते। शायद कभी वह दिन आएगा जब हम ये सब चीजें जुटा पायेंगे। परिणाम विवादों से परे रहे ये एक खुशी की बात रही। प्रतिभागियों ने धैर्य  बनाए रखा उसके लिए उनका आभार। कहीं तीन बजे जाकर कार्यक्रम समाप्त हुआ। लेकिन सब कुछ सुगमता  से हो गया इसका संतोष रहा।

नया ऑफिस देख हम एटा लौटे। खाना प्रभा रेस्टोरेंट में हुआ जो ठीक ही रहा। जो ठीक नहीं रहा वो ये कि संस्था अध्यक्ष ने एक नए कमरे में ज़मीन पर सोने का निर्णय लिया क्योंकि उस कमरे के लिए अभी हम bed खरीद नहीं पाए थे।   अन्य कई लोगों को discomfort पहुँचाने की बजाय खुद ज़मीन पर सोने का निर्णय यूँ तो ठीक था लेकिन  ठण्ड लग जाने के कारण  वो जो बुखार से ग्रसित हो गयीं वो ठीक नहीं रहा। उसके बाद भी वो सिढपुरा कैंप में  शामिल होने पहुँच सकीं उस से निश्चित ही टीम को अच्छी अनुभूति हुयी होगी।

हैल्थ कैंप में कैंसर मरीज़ तो काफी आये लेकिन सामान्य रोगियों के संख्या कम रही। शायद लोगों तक बात पहुँच नहीं पाई होगी। लेकिन जो तीन सौ लोग आये उन्हें सामान्य उपचार पहुंचा कर टीम को काफी संतोष मिला।

प्रभात भाई आ न सके , मनोज भाई को बुलाने की हिम्मत हम जुटा न सके। नीना नहीं आयीं वो कोई बात नहीं लेकिन लौट कर उन्होंने ये भी न पूछा कि कार्यक्रम कैसा रहा उसकी शिकायत तो हम कर ही सकते हैं। आने को तो आरिफ को भी आना था पर कोई बात नहीं। शाहिद को अब क्या कहें? सलाम भाई।

जो आये उनका शुक्रिया खास तौर से धर्मेन्द्र , सुधीर, योगेन्द्र का जो लखनऊ और कानपुर से आये।  शुक्रिया मोहित , भास्कर , पूर्णेश , साजन , बबलू, अनुज , साजिद भाई, शाहिद,  अमजद, अमान , मलिक भाई और पूरी पटियाली टीम का जो हर चीज़ को मुमकिन कर दिखाते हैं।


Thursday, September 13, 2012

इफ्तार , किताबें, छात्र और शिक्षक

रमजान के  मुबारक  महीने में अनुभूति ने हर  साल की तरह इस साल भी एक रोज़ा इफ्तार का आयोजन किया . अमीर खुसरो लाइब्रेरी के  प्रांगण में  सैकड़ों रोज़ेदारों ने इफ्तार कर अनुभूति टीम को जो इज्ज़त बख्शी  उस से हम सब अभिभूत हैं . मोहित, शाहिद , धर्मेन्द्र , सुधीर , अमरजीत , कमल सिंह, आरिफ , आसिम पहुंचे, उनका शुक्रिया . जो नहीं पहुँच सके उनसे उस दिन बहुत शिकायत थी लेकिन आज नहीं।

 राकेश के  कारण National Book Trust के सौजन्य से हम लोग पटियाली में एक पुस्तक मेले का आयोजन भी करा सके . सुखद बात  यह रही कि  इसमें लोगों ,खासकर छात्रों, की भागीदारी काफी अच्छी रही .काफी किताबें बिकीं और  National Book Trust ने बहुत सारी किताबें donate भी कीं।निश्चित ही जब अनुभूति की  लाइब्रेरी बनेगी तो ये किताबें उसकी शोभा बढायेंगीं . धन्यवाद राकेश का . शैलेन्द्र और असलम  भाई   का आना सुखद रहा।

तहसील क्षेत्र के इंटरमीडिएट में 75 प्रतिशत और हाईस्कूल में 80 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले छात्र-छात्राओं को मनोरमा इयर बुक देकर उनका हौसला बढ़ाने की हमारी कोशिश भी कामयाब रही।इस मौके पर कुछ स्कूल के मैनेजमेंट के लोगों को भी हम सम्मानित कर पाए।दिल्ली से  सीबीआई के डीआईजी अमित कुमार इस प्रोग्राम में शामिल हुए और छात्रों का उत्साहवर्धन भी किया। शुक्रिया अमित भाई . पूरे समय मनोज भाई बहुत याद आये।

फिर आया Teachers Day और कई वर्षों की योजना के बाद अंततः हम इस बार उत्कृष्ट शिक्षकों के सम्मान का कार्यक्रम आयोजित कर ही ले गए .अच्छा  ये रहा कि इस अवसर पर बेसिक शिक्षा की समस्याओं पर संगोष्ठी भी हो गयी। इसके निष्कर्ष सरकार तक पहुंचाने का हम प्रयास करेंगे। प्रोफेसर संजय भट्ट और नीना की उपस्थिति से कार्यक्रम की  शोभा भी बढ़ गयी। आभार आप दोनों का।

अनुज , मोहित ,  धर्मेन्द्र , सुधीर , सैफू  मौजूद रहे सो पूरी टीम का मन लगा रहा . शुक्रिया आप सबका और सलाम साजिद भाई और पूरी गंज , पटियाली व एटा टीम को।

टीम अनुभूति





Wednesday, September 12, 2012

Teachers Day

शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में स्थानीय महाविद्यालय के लाइब्रेरी हॉल में अनुभूति सेवा समिति के तत्वावधान में बेसिक शिक्षकों की समस्याओं को लेकर सेमीनार का आयोजन कर उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
सेमीनार में शिक्षकों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि दिल्ली विवि के प्रोफेसर प्रो. संजय भट्ट ने कहा, बेसिक शिक्षकों की अनेक समस्याएं है। शिक्षकों का समाज मूल्यांकन करता है, फिर भी सम्मान नहीं मिलता। शिक्षकों को कभी चुनाव, तो कभी जनगणना में लगा दिया जाता है। जिससे वह अपना शिक्षण कार्य पूर्ण नहीं कर पाते। अध्यक्षता कर रही श्रीमती किरण यादव ने कहा कि बेसिक शिक्षक अपमान नहीं सम्मान से जीना सीखें। सच्चाई के लिए संघर्ष करें। अनुभूति उनकी समस्याओं को सुनकर तथा उच्चाधिकारियों तक पहुंचाकर उनका समाधान कराएगी। सेमीनार को मु. खालिद अंसारी, फारुख कुरैशी, प्रेमवीर सिंह चौहान, मु. फारुख, अवनीश यादव, नदीम, अज्म साबरी, स्नेहलता, अंजू चतुर्वेदी, मु. इरफान, संजय यादव ने भी संबोधित किया। इस दौरान उत्कृष्ट शिक्षकों को शॉल उड़ाकर और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में गंजडुंडवारा से अंतराम यादव, नाथूराम शर्मा, किशनलाल, रामलाल बघेल, रामनारायण, मु. शकील, स्नेहलता, जगदीश पाठक और पटियाली से रामकेशव दीक्षित, सुरेश दीक्षित, महेद्र सिंह, चंद्रभान सिंह, ईश्वरीदपाल, सिढ़पुरा से नन्नूपाल, इन्दल सिंह, हरदम सिंह, सुन्नीलाल, शिवराम सिंह, डा. हरेंद्र त्यागी, हाफिज किफायतुल्ला, उमेश आर्य, मनीष चौहान, संजय यादव, अवनीश यादव, मनीष सिंह, अनिल कुमार, प्रमोद अपाध्याय, अंजू चतुर्वेदी, किशनचंद्र तिवारी सहित अनेक लोग मौजूद थे। अध्यक्षता प्रमुख समाज सेविका किरण यादव ने की। जबकि संचालन प्रो. नीना ने किया।

Sunday, August 19, 2012

शाहिद का जाना 

ये उन दिनों की बात है जब हम पटियाली में काम शुरू करने के बारे में सोच ही रहे थे. भोले बाबा ( मनोज भाई ) से मार्गदर्शन लेने गए तो उन्होंने कहा रुक मैंने शाहिद को बुलाया है . वो आ जायेगा तब बात करेंगे. उन्होंने कहा था अपने जैसा है तुझे जमेगा .फिर फ़ोन पर उन्होंने ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में शाहिद को लेट होने के लिए डांटा भी था. भोले की बात को मैंने बहुत गंभीरता से नहीं लिया था.I 
always thought he is prone to over rate people. पहली मुलाक़ात ठीक ठाक ही रही . It was neither greatly exciting nor routinely disappointing.

उसके बाद हम न जाने कितनी बार मिले और न जाने पटियाली की हमने कितनी यात्रायें कीं. And this time Bhole, you were bang on the mark. अगर पटियाली में हम कुछ कर पाए हैं तो उसका प्रमुख श्रेय शाहिद को ही जाता है. बारिश में और बाढ़ में, आग में और धूप में शाहिद तुम ही थे जो गतिविधियों के केंद्र बिंदु में थे. साजिद भाई से बात करने से लेकर, समाचारों के प्रकाशन तक सब कुछ तुम ही देखते थे. व्यक्तिगत तौर पर मैंने तुम्हारी आलोचना भी बहुत की , drawing a parallel to Vimal being only one of them. उस सबके बावजूद न केवल तुमने हम सबको और ख़ास कर मुझे बर्दाश्त किया बल्कि अनुभूति को खड़ा करने में महती भूमिका भी निभायी. It was not with out reason that Bhole felt Shahid was giving more time to Anubhuti then to Sahyatri. And now all of a sudden we realise you will not be here.

Shahid has been selected as Associate Professor for the Department of Social Work, Maulana Azad National Open University, Hyderabad. It is a promotion for him and should make all of us happy. But the pain of parting is so overwhelming that we are not able to rejoice. We are sure if we had those extra 30000 rupees we wont let him go and he i am sure would have stayed back. But then fact of the matter is that all of us are struggling financially and he is the worst hit of us all.

He will be joining there on 16th August. All of us know this could have been around 8-9th August but Shahid chose to delay it for the programmes of Anubhuti on 11th & 12th August 2012. अब हमारा रिश्ता ऐसा नहीं बचा कि मैं तुम्हें इसके लिए शुक्रिया कहूं. I am known for putting up brave face in the worst of times. But this time i am not sure.

तुमसे हमेशा कुछ मांगता ही रहा, देने के लिए मेरे पास है भी क्या. I ask you again, please remember us and keep the commitment you have made to me and Bhole. Grow big but not like your illustrious predecessors who went to Mumbai.

We love you and will miss you more than you will ever know.





Team Anubhuti
पटियाली (ब्यूरो)। कसबा के अमीर खुसरो पुस्तकालय में अनुभूति सेवा समिति की ओर से रोजा इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां पर हजारों की संख्या में मुसलिम समाज के लोगों ने  रोजा इफ्तार पार्टी में शिरकत कर नमाज अदा की और अल्लाह ताला से अमन चैन की दुआएं मांगी। इस मौके पर  मोहित गुप्ता, धर्मेंद्र सचान, पूर्व चेयरमैन आबाद हुसैन, सपा नगर अध्यक्ष हशमत अली, नसीम मंसूरी चमन कुरैशी, सतेंद्र पांडेय, शाहिद मलिक, मलिक एम साजिद कलम, साहिद खान, अमजद खान आदि उपस्थित  थे।
अनुभूति ने पढ़ाया कामयाबी का पाठ
कैरियर बनाने के लिए छात्रों को दिए टिप्स
पटियाली। अनुभूति सेवा समिति द्वारा मेधावी एक बड़े कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। तहसील क्षेत्र के इंटरमीडिएट में 75 प्रतिशत और हाईस्कूल में 80 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले छात्र-छात्राओं को इस अवसर पर  पुरस्कृत किया गया।
दिल्ली से आए सीबीआई के डीआईजी अमित कुमार ने कहा कि पिछड़े क्षेत्र में प्रतिभाओं के सम्मान और पुरस्कृत करने से उन्हें आ
गे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। समारोह में मौजूद विद्यार्थियों को अधिकारी बनने के टिप्स भी  दिए गए । अनुभूति सेवा समिति के द्वारा आमंत्रित अतिथियों  ने कहा कि कंपीटीशन की तैयारी करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी हासिल करें और संबंधित परीक्षा के 10 वर्ष के प्रश्न पत्रों का भली भांति अवलोकन कर लें। इससे कंपीटीशन की तैयारियों से संबंधित प्रश्नों के बारे में खासी जानकारी हो जाती है।उन्होंने कहा कि अनुभूति का संकल्प है कि पटियाली जैसे पिछडे़ क्षेत्र में इसी  तरह के रचनात्मक कार्य कर प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका दिया जाए।


 समिति की अध्यक्षा किरण यादव ने उपस्थित आगुंतकों का आभार जताते हुए समिति द्वारा कराए गए रचनात्मक कार्यों के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर मु. असलम एडीसनल जीएमबीएसएनएल, अजय मिश्रा, सुधीर त्यागी, धर्मेंद्र सचान, शैलेंद्र सिंह, मोहित गुप्ता, संजय यादव, मनीष चौहान, संजीव कुमार प्रधानाचार्य, रामकिशन दीक्षित, प्रो. साहिद अली, साहिद मलिक, मलिक एम साजिद कलम, सतेंद्र पांडेय आदि उपस्थित थे।